माँ का मौन
बाबा
जब आप गुस्से में
डाँटते थे
डरे -सहमें से हम बच्चे
दुबक जाते थे
घर के किसी कोने में
अन्ताक्षरी खेल -खेल कर
प्रतीक्षा करते थे
जब उतर जायेगा गुस्से का ज्वार
तब निकल आएगी हमारी सेना
पलंग के नीचे से
सोफे के पीछे
फिर से हुडदंग को तैयार
पर माँ .....
माँ नाराज़ होने पर कुछ नहीं कहती
बहुधा हो जाती थी मौन
माँ के मौन होते ही
मौन हो जाता आँगन
मौन हो जाता तुलसी का पौधा
मौन रसोई
मौन बर्तन
मौन गुड़ियां
मौन खिलौने
माँ का मौन पसर जाता हमारे अन्दर
भूल ही जाते हर शैतानी
खो जाते हम बच्चों के स्वर
तब महसूस होता था
सही कहती थी दादी
माँ से संतान की नार कभी कटती नहीं है
बाबा
जब आप गुस्से में
डाँटते थे
डरे -सहमें से हम बच्चे
दुबक जाते थे
घर के किसी कोने में
अन्ताक्षरी खेल -खेल कर
प्रतीक्षा करते थे
जब उतर जायेगा गुस्से का ज्वार
तब निकल आएगी हमारी सेना
पलंग के नीचे से
सोफे के पीछे
फिर से हुडदंग को तैयार
पर माँ .....
माँ नाराज़ होने पर कुछ नहीं कहती
बहुधा हो जाती थी मौन
माँ के मौन होते ही
मौन हो जाता आँगन
मौन हो जाता तुलसी का पौधा
मौन रसोई
मौन बर्तन
मौन गुड़ियां
मौन खिलौने
माँ का मौन पसर जाता हमारे अन्दर
भूल ही जाते हर शैतानी
खो जाते हम बच्चों के स्वर
तब महसूस होता था
सही कहती थी दादी
माँ से संतान की नार कभी कटती नहीं है