" महिला लेखन "
नारी के लिए
आसान नहीं रहा है
सामाजिक तौर पर
कुछ भी बोलना
मुँह की देहरी
बन जाती है
लक्ष्मण -रेखा
जिसको पार
करते ही
एक -एक शब्द के
लिए जाते है
व्यापक
अर्थ -अनर्थ
तोली जाती है
हर वाक्य में
मर्यादा
उठती है
उँगलियाँ
इसलिए
चाहते न चाहते हुए
हर नारी
हत्या करती रहती है
अपने इन
अजन्मे
शिशु शब्दों की
क्या यही कारण है
जब से हुई है
नारी मुखर
उठाई है कलम
युगों की
टीस कसक
को मिलने लगा है
स्वर
और बन जाता है
महिला -लेखन
ज्यादा भावना -प्रधान
मार्मिक
या सशक्त
नारी के लिए
आसान नहीं रहा है
सामाजिक तौर पर
कुछ भी बोलना
मुँह की देहरी
बन जाती है
लक्ष्मण -रेखा
जिसको पार
करते ही
एक -एक शब्द के
लिए जाते है
व्यापक
अर्थ -अनर्थ
तोली जाती है
हर वाक्य में
मर्यादा
उठती है
उँगलियाँ
इसलिए
चाहते न चाहते हुए
हर नारी
हत्या करती रहती है
अपने इन
अजन्मे
शिशु शब्दों की
क्या यही कारण है
जब से हुई है
नारी मुखर
उठाई है कलम
युगों की
टीस कसक
को मिलने लगा है
स्वर
और बन जाता है
महिला -लेखन
ज्यादा भावना -प्रधान
मार्मिक
या सशक्त