झिलमिल में उठते हैं परदे, झिलमिल में ही गिर जाते हैं
शफ़्फ़ाफ़ उजालों में गिनती के खालिस मन थिर पाते हैं
अधेरों और उजालों की इसी छिड़ी जंग में अक्सर ही
अपनों से गद्दारी करके ये दोनों हाथ मिलाते हैं
वंदना बाजपेयी