गुरुवार, 24 नवंबर 2022

दहेज पैसे का उचित बंटवारा नहीं

 

वो थे नए जमाने के माता-पिता

बेटे-बेटियों में भेद ना करने वाले

लिहाजा

60 की उम्र तक खून पसीना एक कर कमाई गई

कैश राशि को

बेटे पर बेटी में बाँट दिया आधा-आधा

बेटे के हिस्से आया, कैश

और बेटी के लिए उसी से दिया दहेज़

पर बेटी के दहेज के हिस्से से खाया

बारात और जनात ने

बरतावन और कलेवा निपटा उसी से

ससुराल वालों ने भी दिए गए कैश से

बना दिए जेवर चढ़ावे के

सीसामऊ वाली ननद प्यार से माँगकर ले गई

बर्तन भाड़े

बाकी ससुराल वालों ने लिया रोक

कहाँ ले जाओगे

ट्रक में लाद-लूद कर

खरीद लेना वहीं नया

बात भी सही है

सास-ससुर राजी-खुशी

माता-पिता खुश हैं

पर बेटी आश्रित है अभी भी ससुराल वालों की मर्जी की

बराबरी से दिए गए पैसे में उसे भला मिला क्या ?