"यह है … या नहीं है "
एक ऊँगली का इशारा
कुछ अक्षर चिन्हों का योग
और जीवन के विस्तृत कैनवास पर
अस्तित्व में आ जाता है एक संसार
या एक समूची सृष्टि
जो है भी , और नहीं भी है
जहां है बहुत सारे लोग
फूल पत्ती ,झरने ,गिरी कंदराएँ
जहाँ नहीं है दीवारें
राजाओं की ,रियासतों की
देशों की धर्म की
आह !क्या यह स्वर्ग है
तभी अचानक
अमूर्त का मूर्त रूप ले
बोलने लगती है
मानवीय आकृतियाँ
गीत गाने लगते है
फूल- पत्ती, झरने
शुरू हो जाता है कलरव
लग जाती है हाट
तय होने लगती है
सामानों की कीमत
कुछ खास नियमों के द्वारा
बढ़ने लगता है अहंकार
या टूटने लगती है हिम्मत
इन सब के मध्य
कही बढ़ रहा है अनुराग
फूटने लगी है
रिश्तों की कोपलें
और कही विवाद
डसने लगते है
ईर्ष्या -क्रोध के सर्प
तैयार हो जाते है योद्धा
खिचती है तलवारें
भयाक्रांत होने लगता है मन
टूटते -बनते रिश्तों से
क्रोध और नफरत के स्फुलिंगों से
.
तभी अचानक
एक उंगली के इशारे पर
विलीन हो जाती है
सारी सृष्टि
जो थी भी और नहीं भी थी
और मैं लौट आती हूँ
उस सृष्टि में
जो है …… या
शायद …नहीं है
क्योँकी
"बहम सत्य और जगत मिथ्या "
के सिद्धांत पर चलने वाली
यह समूची सृष्टि
कही ईश्वर द्वारा
मात्र
एक उंगली के इशारे पर
चलायी जाने वाली
fb ही तो नहीं है
एक ऊँगली का इशारा
कुछ अक्षर चिन्हों का योग
और जीवन के विस्तृत कैनवास पर
अस्तित्व में आ जाता है एक संसार
या एक समूची सृष्टि
जो है भी , और नहीं भी है
जहां है बहुत सारे लोग
फूल पत्ती ,झरने ,गिरी कंदराएँ
जहाँ नहीं है दीवारें
राजाओं की ,रियासतों की
देशों की धर्म की
आह !क्या यह स्वर्ग है
तभी अचानक
अमूर्त का मूर्त रूप ले
बोलने लगती है
मानवीय आकृतियाँ
गीत गाने लगते है
फूल- पत्ती, झरने
शुरू हो जाता है कलरव
लग जाती है हाट
तय होने लगती है
सामानों की कीमत
कुछ खास नियमों के द्वारा
बढ़ने लगता है अहंकार
या टूटने लगती है हिम्मत
इन सब के मध्य
कही बढ़ रहा है अनुराग
फूटने लगी है
रिश्तों की कोपलें
और कही विवाद
डसने लगते है
ईर्ष्या -क्रोध के सर्प
तैयार हो जाते है योद्धा
खिचती है तलवारें
भयाक्रांत होने लगता है मन
टूटते -बनते रिश्तों से
क्रोध और नफरत के स्फुलिंगों से
.
तभी अचानक
एक उंगली के इशारे पर
विलीन हो जाती है
सारी सृष्टि
जो थी भी और नहीं भी थी
और मैं लौट आती हूँ
उस सृष्टि में
जो है …… या
शायद …नहीं है
क्योँकी
"बहम सत्य और जगत मिथ्या "
के सिद्धांत पर चलने वाली
यह समूची सृष्टि
कही ईश्वर द्वारा
मात्र
एक उंगली के इशारे पर
चलायी जाने वाली
fb ही तो नहीं है