जिंदगी की किताब में किसी गुलाब की तरह
हमेशा सँजो कर नहीं रखे जाते
जीवन के किसी उदास मौसम में
बहार लाकर अचानक से खो जाने वाले लोग
बल्कि मन छुड़ाना चाहता है
उन यादों से पीछा
जिन्होंने कुछ पल के लिए ही सही
पर पतझड़ के मौसम में
जीने के आदी मन को
दिखा दिया था पतझड़ और बहार में फर्क
और अनजाने ही कुरेद दिया था एक ढका-मुदा घाव
