शनिवार, 16 अगस्त 2014

                                                  !!!!!!!!!बेनकाब !!!!!!!!!!!!!!!



सर पर एक  स्नेह भरा हाथ
और दो मीठे बोल सुनकर
बहुधा
फूट ही जाता है
आँखों से आंसुओं का दरिया
खुल ही जाता है भेद
कि हर मुस्कुराते चेहरे के पीछे
अंतस में
गहरे  बहुत  गहरे
छिपी है कितनी घनी पीर
या खुदा !!
 तेरे जहाँ  में  कोई बेनकाब नहीं है। 

बुधवार, 13 अगस्त 2014

                                                      !!!!!!!!!यह भी है  आज़ादी  की लड़ाई !!!!!!!!!



स्वतंत्र भारत के झंडे  के ठीक नीचे  
चल रही है  एक और आज़ादी की लड़ाई
दोहराते हुए आपने इतिहास
बज रहा है बिगुल
 कि ले सके अगली पीढ़ी  "आज़ादी की साँस "
उड़ खड़े हुए है योद्धा
युद्ध भूमि में अर्पित करने को रक्त
हँस -हँस कर चूमने को फांसी का फंदा

खुद बना कर नमक तोड़ रहे हैं
तुम्हारा "नमक का कानून '
चल रहा है
कही सविनय अवज्ञा आांदोलन
कही हिंसा के खिलाफ ललकारते हुए
 लाठी -चार्ज के आगे
दृण खड़े है सेनानी
लगाई है पुकार
"तानाशाहों घर छोड़ो "
 रोकर आत्महत्या नहीं करती
लड़ती हैं अंतिम साँस तक"  निर्भया "
आतताइयों की बर्बरता के खिलाफ
दहेज की बलवेदी पर चढ़ने की जगह
दरवाज़े से लौटाती है बरात" निशा "
की नहीं झुकने देगी पिता का सर
उतार  कर फेंक दिया है बुर्का और घूंघट
शबाना और राधा ने
 कि  हमें भी देखनी है दुनियाँ
और वो एक ग्राम की छुटकी
डॉक्टर की सुई की धता बँधाते हुए
छिप जाती है माँ के गर्भ के कोने में
की तुम्हारी लाख कोशिशों के बाद भी
वजूद में आएगा X क्रोमोजोम

वो तिरंगा झंडा
जो दादी की दादी की दादी नें
अपने आंसुओं में छिपा कर रखा था
पाताल से खोज निकला है आधी आबादी नें
आ रहा है समवेत स्वर
"स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और हम इसे ले कर रहेंगे "