शनिवार, 16 अगस्त 2014

                                                  !!!!!!!!!बेनकाब !!!!!!!!!!!!!!!



सर पर एक  स्नेह भरा हाथ
और दो मीठे बोल सुनकर
बहुधा
फूट ही जाता है
आँखों से आंसुओं का दरिया
खुल ही जाता है भेद
कि हर मुस्कुराते चेहरे के पीछे
अंतस में
गहरे  बहुत  गहरे
छिपी है कितनी घनी पीर
या खुदा !!
 तेरे जहाँ  में  कोई बेनकाब नहीं है। 

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