मेहँदी
दो अपरिचित लोगों के मध्य
विवाह की
पवित्र गाँठ
जाने कहाँ से लाती है पत्तियाँ
कूट -पीस कर जिन्हें
उकेर देती है
फूल -पत्ती
बना देती है बेल कंगूरे
मन की हंथेली पर
धीरे -धीरे
चढ़ जाता है
ऐसा रंग
प्रेम और विश्वास का
जो जन्म -जन्मांतर तक
उतरता ही नहीं
दो अपरिचित लोगों के मध्य
विवाह की
पवित्र गाँठ
जाने कहाँ से लाती है पत्तियाँ
कूट -पीस कर जिन्हें
उकेर देती है
फूल -पत्ती
बना देती है बेल कंगूरे
मन की हंथेली पर
धीरे -धीरे
चढ़ जाता है
ऐसा रंग
प्रेम और विश्वास का
जो जन्म -जन्मांतर तक
उतरता ही नहीं
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