सुना तुमने ,
नीला नहीं हरा है
मेरे सपनों का आकाश
और सदा हरा ही रहेगा
क्योंकि
बहुत गहरे दबा है बीज
जब - जब तुम
काटोगे टहनियां
फूट पड़ेंगी
नयी कोपलें
और बढ़ चलेंगी आसमानों की ओर
करने को हरा
मैं जानती हूँ
बहुत तीखे है तुम्हारे वार
पर इस बार
मैं भी तैयार हूँ
कलम ले कर
सकारात्मक सोच दर्शाती बहुत सुंदर रचना।
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