रविवार, 10 अप्रैल 2016

शब्दों का बंटवारा




हवा तेज है
कस कर बांध लेना चाहती हूँ गठरी
कहीं खुल न जाए
उसके खुलते ही
बिखर जायेंगे कुछ शब्द
और देखते ही देखते
,मेरे शब्द
रंग दिए जायेंगे
भगवा या लाल रंगों में
तय कर दी जायेगी उनकी दिशा
लेफ्ट या राईट
मिल जायेगी उपाधि
भक्त या विरोधी की
दोनों तरफ तलवार लिए बैठे हैं सैनिक
नहीं है दूसरी तरफ जाने का रास्ता
इतिहास गवाह है
जब- जब हवाएं तेज हुई है
चाहते न चाहते
बंटजाते हैं शब्द
दौड़ पड़ते हैं अपनी - अपनी दिशा में
इस भगदड़ में
हर बार मारा जाता है
एक मासूम साशब्द
इंसानियत
वंदना बाजपेयी

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