जब -जब
उठ खड़ी होती है एक स्त्री
अपने ऊपर लगाये गए तमाम
नैतिक -अनैतिक आरोपों के विरूद्ध
पूरे तथ्यों के साथ
नहीं डरती है आलोचनाओं से
नहीं मांगती है मॉफी
नहीं देती हैं अग्नि परीक्षा
तब - तब
सिद्ध करती हैं
की हर सीता के अन्दर
उपस्तिथ है एक दुर्गा
जो कर सकती है
महिषासुरों का मर्दन
और अपने स्व की रक्षा
बस उसे
खुद को
पहचानने की देर है
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