माय च्वाइस
अब दरवाजे के बाहर
खाट डाल कर बैठी बुजुर्ग औरतें
गर्भवती बहू को देखकर
नहीं लगाती हैं अनुमान
कौन सा पैर पहले उठा
दायाँ या बायाँ
नहीं पूछती हैं प्रश्न
खाने में क्या अच्छा लगता है
मीठा या नमकीन
सीधे सुनाया जाता है फरमान
अस्पताल जाने का
की पहले ही हो जाए
दूध का दूध ,पानी का पानी
मुस्कुराती बहुएं
मानती हैं आदेश शत -प्रतिशत
की जन्म से पहले ही क्यों न तय कर लिया जाए
किसे लेना है
ममता के घेरे में
मातृत्व हो गया है आरक्षित
ख़ास लिंग के लिए
क्या कहा जाए इसे
विज्ञान का वरदान
ममता का चयन
दो पीढ़ियों की एकता
या वो जो आजकल कहा जा रहा है
माय च्वाइस
वंदना बाजपेई
अब दरवाजे के बाहर
खाट डाल कर बैठी बुजुर्ग औरतें
गर्भवती बहू को देखकर
नहीं लगाती हैं अनुमान
कौन सा पैर पहले उठा
दायाँ या बायाँ
नहीं पूछती हैं प्रश्न
खाने में क्या अच्छा लगता है
मीठा या नमकीन
सीधे सुनाया जाता है फरमान
अस्पताल जाने का
की पहले ही हो जाए
दूध का दूध ,पानी का पानी
मुस्कुराती बहुएं
मानती हैं आदेश शत -प्रतिशत
की जन्म से पहले ही क्यों न तय कर लिया जाए
किसे लेना है
ममता के घेरे में
मातृत्व हो गया है आरक्षित
ख़ास लिंग के लिए
क्या कहा जाए इसे
विज्ञान का वरदान
ममता का चयन
दो पीढ़ियों की एकता
या वो जो आजकल कहा जा रहा है
माय च्वाइस
वंदना बाजपेई
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें