वंदना बाजपेयी
शुक्रवार, 10 अप्रैल 2015
अफ़सोस
अफ़सोस
थाम कर जिनका हाथ
पार करनी चाही थी
अहसासों की
वैतरणी
पिघल गए
समय की घूप से
आखिरकार
शब्द ही तो थे
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