जीवन का रेखा गणित
रेखाएं कभी झूठ नहीं बोलती
झूठ बोलते हैं वृत्त
आड़ी तिरछी ,छोटी बड़ी
जैसी भी हो
रेखाएं स्वीकारती हैं
अपने निज रूप को
पूरी सहजता से
चलती हैं
उलझती सुलझती
छिपाती नहीं है
साथ चलते हुए भी
सामानांतर दूरी
चलती हैं
इस उम्मीद के साथ
कि अनंत में ही सही
मिल तो जायेंगे
और वृत्त
बनाते हैं झूठ का एक घेरा
अपने चारों और
की बमुश्किल
साधा है संतुलन
त्रिज्यओं के बीच
किसी को काट कर छोटा किया
किसी को खीच कर लंबा
फिर भी जीवन के
रेखागणित में
वृत्तों का महत्त्व है
हम खींचते हैं
एक वृत्त
अपने चारो ओर
परिवार के चारो ओर
समाज के चारो ओर
दरकते अंदर
साधते असंतुलन
छिपाते बहुत कुछ
और बाहर लगा देते है
एक साइन बोर्ड
सब ठीक है
वंदना बाजपेई
रेखाएं कभी झूठ नहीं बोलती
झूठ बोलते हैं वृत्त
आड़ी तिरछी ,छोटी बड़ी
जैसी भी हो
रेखाएं स्वीकारती हैं
अपने निज रूप को
पूरी सहजता से
चलती हैं
उलझती सुलझती
छिपाती नहीं है
साथ चलते हुए भी
सामानांतर दूरी
चलती हैं
इस उम्मीद के साथ
कि अनंत में ही सही
मिल तो जायेंगे
और वृत्त
बनाते हैं झूठ का एक घेरा
अपने चारों और
की बमुश्किल
साधा है संतुलन
त्रिज्यओं के बीच
किसी को काट कर छोटा किया
किसी को खीच कर लंबा
फिर भी जीवन के
रेखागणित में
वृत्तों का महत्त्व है
हम खींचते हैं
एक वृत्त
अपने चारो ओर
परिवार के चारो ओर
समाज के चारो ओर
दरकते अंदर
साधते असंतुलन
छिपाते बहुत कुछ
और बाहर लगा देते है
एक साइन बोर्ड
सब ठीक है
वंदना बाजपेई
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