!!!!!!!!!!अर्ध सत्य !!!!!!!!!!
(चित्र गूगल से साभार )
उगते सूर्य की लालिमा
भर देती है मन में विश्वास की
स्याह घनी रात्रि के बाद
अवश्य फैलेगा उजास
हो जाता है आशा का संचार
इस विश्वास के साथ की यही सत्य है
चल पड़ता है राही
अस्वीकार करते हुए तथ्य
ठीक बारह घंटे बाद
पुनः लीलेगा
अंधकार उजास को
क्योंकि
अँधेरे के बाद उजाले का
सुख के बाद दुःख का
अनुराग के बाद वैराग्य का
प्रसिद्धि के बाद गुमनामी का
जीवन के बाद मृत्यु का
एक के बाद दूसरे का क्रमानुसार आना
ही जीवन है
यही सत्य है
इसके अतिरिक्त
वह सब कुछ
जो आज है
वर्तमान है ,प्रत्यक्ष है
सब है आधा -अधूरा
सब है
अर्ध सत्य
भर देती है मन में विश्वास की
स्याह घनी रात्रि के बाद
अवश्य फैलेगा उजास
हो जाता है आशा का संचार
इस विश्वास के साथ की यही सत्य है
चल पड़ता है राही
अस्वीकार करते हुए तथ्य
ठीक बारह घंटे बाद
पुनः लीलेगा
अंधकार उजास को
क्योंकि
अँधेरे के बाद उजाले का
सुख के बाद दुःख का
अनुराग के बाद वैराग्य का
प्रसिद्धि के बाद गुमनामी का
जीवन के बाद मृत्यु का
एक के बाद दूसरे का क्रमानुसार आना
ही जीवन है
यही सत्य है
इसके अतिरिक्त
वह सब कुछ
जो आज है
वर्तमान है ,प्रत्यक्ष है
सब है आधा -अधूरा
सब है
अर्ध सत्य

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