!!!!!!!!!अचानक !!!!!!!!!!!
सहसा
सहसा
(चित्र गूगल से साभार )
क्यों मन बंधने लगता है
किसी अपरिचित से
अचानक
सहसा .........
किसी अपरिचित से
अचानक
सहसा .........
क्यों मन पिघलने लगता है
किसी अजनबी के दर्द से
अचानक
सहसा .............
किसी अजनबी के दर्द से
अचानक
सहसा .............
क्यों मन नाचने लगता है
बेगानी बरात की धुनों पर
अचानक
सहसा ..............
बेगानी बरात की धुनों पर
अचानक
सहसा ..............
चौरासी लाख योनियों में घुमते हुए
कहीं न कहीं जुड़े हैं हमारे रिश्ते
पर हमने
अपने मन के चारों ओर
कस रखे हैं
अपरिचित होने हैं पिंजरे
कहीं न कहीं जुड़े हैं हमारे रिश्ते
पर हमने
अपने मन के चारों ओर
कस रखे हैं
अपरिचित होने हैं पिंजरे
इसीलिये सब दुखी हैं
सब तड़पते हैं
ढूढ़ते हैं
उस शख्स को
जो खोल देगा पिंजरों को
और मुक्त कर देगा मन को
अचानक
सहसा ...................
सब तड़पते हैं
ढूढ़ते हैं
उस शख्स को
जो खोल देगा पिंजरों को
और मुक्त कर देगा मन को
अचानक
सहसा ...................

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