सफ़र
(चित्र गूगल से साभार )
एक स्त्री जब तय करती है
पायलों की छन -छन से सैंडल की खट -खट का सफ़र
तो बहुत से सुर डूब जाते हैं उसके अन्दर
बचना चाहती है कुछ स्वर लहरियों से
अभ्यस्त था जिसका जीवन
इसलिए चलती है तेज -तेज
उभर आती हैं पसीने की कुछ बूंदे
भिन्न होता है जिनका स्वाद
जब उभरी थी ये
घर का आँगन
गोबर से लीपते हुए
या तुलसी का बिरवा सीचते हुए
पानी और नमक का मिश्रण
कितना पृथक
आह !कितना पृथक ?
एक घर का मान
एक व्यक्ति का सम्मान
तड़पती है औरत
घोलना चाहती दोनों श्रम सीकरों को एक साथ
एक चाँद की शीतलता
एक सूर्य का स्वाभिमान
ढूढती है वो क्षितिज
जहाँ स्वीकार्य होंगे दोनों
क्रम से उदय अस्त
तभी
तभी मान्य होगी
वह है औरत होने से पहले
एक व्यक्ति

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