बुधवार, 31 दिसंबर 2014

रंग 

हल्दी और चूने का मिलन
बना देता है
रंग केसरिया 
क्या
तथाकथित प्रेम का ?
एक गाँठ में
बंधे दो रंग
लगते है सुन्दर
सह अस्तित्व में
अपनी -अपनी निजता संभाले
न विजय का भाव
न पराजय का भय
रंग दि खता है
ख़ुशी का
अनाधिकार चेष्टा
रंगने को दुसरे को
अपने ही रंग में पूर्णतया
एक छद्म युद्ध
छोड़ देता है
एक ही रंग
धुंधला सा
निराशा का
वंदना बाजपेयी

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