बुधवार, 9 जुलाई 2014


बच्चे.........................और वो भी आज की जनरेशन के .
बाप रे बाप ...............

आजकल के बच्चों ने कंप्यूटर ,मोबाइल ,लैपटॉप आदि को अपना  दोस्त बना  लिया है ।
मोबाइल और लैपटॉप पर गाने सुनना तो जैसे उनका नित्य कर्म बन गया है.

घर हो या बाहर, अक्सर बच्चे कानों में इअर फ़ोन लगाये मिल जाते हैं .
सबसे ज्यादा हालात घर में ख़राब हैं । पहले तो बच्चे कुछ सुनते नहीं, 

यदि   डांटो तो  झट से सॉरी बोल देते हैं "सॉरी मम्मी हमको सुनाई ही दिया नहीं "।  इस वजह से हम मम्मी लोग कितना
त्रस्त रहते हैं , इस व्यथा को मैंने कविता का रूप दिया है ।


सॉरी मम्मी हमको सुनाई दिया ही नहीं ................

सुबह जब हम किचन में सब्जी बना  रहे
दूध वाले भईया बाहर घंटी बजा रहे
जैसे तैसे दूध ले के  देखा बच्चे संग हैं
दोनों कान उनके द्वारपालों  से बंद हैं
गुस्से में पूछा तुमने दूध क्यों लिया नहीं
सॉरी" मम्मी हमको सुनाई ही दिया नही "

बच्चों का प्रोजेक्ट बड़ी मेहनत से बनवाया
घंटे- डेढ़ घंटे सारा प्रोसीजर समझाया
दूजे दिन बोले मम्मी फिर समझाइये
ज्ञान को हमारे आप और भी बढाइये
कल था समझाया तुमने कुछ क्यों किया नहीं
सॉरी" मम्मी हमको सुनाई ही दिया नही "

सोने चले कहा" अब हम से न बोलना"
सेल्समेन आये दरवाज़ा नहीं खोलना
झपकी लगी ही थी की बच्चे उठा रहे
मम्मी , साबुन वाले अंकल बुला रहे
कहा:" गेट से ही उन्हें क्यों  दफा किया नहीं"
सॉरी" मम्मी हमको सुनाई ही दिया नहीं "

गुस्से में जब हम लाल हो जाते हैं
बच्चों पर चाहे जितना चिल्लाते हैं
पर जवाब बच्चे कभी भी नहीं देते हैं
श्रवण कुमार को भी मात कर देते हैं
इस अनोखी बात का है राज़ भी छिपा नहीं
सॉरी" बच्चों तुमको सुनाई  ही दिया नहीं"

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