शुक्रवार, 11 जुलाई 2014

                                               """"""सुनो सखी """""""""


सुनो सखी !विश्राम कहाँ है ?
जीवन के विस्तृत कानन में
साँसों के सीमित बंधन में
ढूंढो! अपना मुकाम कहाँ है ?

इतिहास से निकली सीता
प्रश्न उठाती हर परणीता
अग्नि -परीक्षा दे जो संग में
किसी  युग में वो राम कहाँ है ?

प्रकृति हो तुम ,नहीं बस नारी
सृजन की बड़ी है जिम्मेदारी
नव भविष्य निज गर्भ में पलता
फिर भी! अपना नाम कहाँ है ?

चलो बनायें हम उस कल को
जहाँ सुता भविष्य उज्जवल हो
कलम कुदालों में जब बदले
तब ! अल्प या पूर्ण विराम कहाँ है ?

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