सोमवार, 14 जुलाई 2014

                                        !!!!!!!!!!!!! अंतर !!!!!!!!!!!!!!!!!

बचपन में मुझे मिली थी 
गुड़ियाँ 
सुन्दर
नीली आँखों वाली
तुम्हे मिली थी बन्दूक
काली
डरावनी ,खौफनाक

मैं मिन्नते  करती
श श श। …
धीरे बोलो
गुड़ियाँ जाग जाएगी
तुम कहते
आवाज़ निकली तो
 ठोंक  दी जाएगी

मैं मिट्टी के बर्तन में
धीरे -धीरे
बनाती थी खाना
तुम्हे भाता था
घोड़े पर सवार
कड़बक -कड़बक
फसल रौंदते आना

मैंने सीखा
कलेजे से लगा गुड़ियां को सुलाना
तुमने सीखा
हुकूमत चलाना
हम बड़े हुए
खिलौने छुटे
दुर्भाग्य
हमारे -तुम्हारे बीच
यह अंतर
बना रहा  

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