"वसंत ऋतु "
फिर पद चाप
सुनाई पड़ रहे
वसंत ऋतु के आगमन के
जब वसुंधरा
बदलेगी स्वेत साडी
करेगी श्रृंगार
उल्लसित वातावरण में
झूमने लगेंगे
मदन -रति
और अखिल विश्व
करने लगेगा
मादक नृत्य
सजने लगेंगे
बाजार
अस्तित्व में
आयेगे
अदृश्य तराजू
जो फिर से
तोलने लगेंगे
प्रेम जैसे
विराट शब्द को
उपहारों में
अधिकार भाव में
आकर्षण में
भोग -विलास में
और विश्व रहेगा
अतृप्त का अतृप्त
फिर सिसकेगी
प्रेम की
असली परिभाषा
क्योकि
जिसने उसे जान लिया
उसके लिए
हर मौसम
वसंत का है
जिसने नहीं जाना
उसके लिए
चार दिन के
वसंत में भी क्या है ?
वंदना बाजपेई
13.01.14
फिर पद चाप
सुनाई पड़ रहे
वसंत ऋतु के आगमन के
जब वसुंधरा
बदलेगी स्वेत साडी
करेगी श्रृंगार
उल्लसित वातावरण में
झूमने लगेंगे
मदन -रति
और अखिल विश्व
करने लगेगा
मादक नृत्य
सजने लगेंगे
बाजार
अस्तित्व में
आयेगे
अदृश्य तराजू
जो फिर से
तोलने लगेंगे
प्रेम जैसे
विराट शब्द को
उपहारों में
अधिकार भाव में
आकर्षण में
भोग -विलास में
और विश्व रहेगा
अतृप्त का अतृप्त
फिर सिसकेगी
प्रेम की
असली परिभाषा
क्योकि
जिसने उसे जान लिया
उसके लिए
हर मौसम
वसंत का है
जिसने नहीं जाना
उसके लिए
चार दिन के
वसंत में भी क्या है ?
वंदना बाजपेई
13.01.14
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