सोमवार, 13 जनवरी 2014

                                                  "स्वागत है ऋतुराज "


आगमन हो रहा है
वसंत का
कर लिया है
प्रकृति ने श्रृगार
आरंभ हो गया है
मदन -रति का
नृत्य
मैंने भी
 निकाल लिए है
कुछ सूखे
लाल गुलाब
जो तुम्हारे
स्पर्श से
पुनः खिल जायेगे
वो पुरानी बिंदिया
जो तुम्हारी
दृष्टि पड़ते ही
सुनहरी हो जायेगी
और सिल ली है
वो पायल
जिसकी
छन -छन
सीधे तुम्हारे
ह्रदय में जायेगी
हर वसंत
की तरह
इस बार भी
पुनः और दृढ
हो जायेगा
हमारे रिश्ते का वृक्ष
जिसे वर्ष भर
असंख्य जिम्मेदारियों
और व्यस्तताओ के बीच
धीरे -धीरे ,चुपके -चुपके
सींच रहे थे
हम -तुम
"स्वागत है ऋतुराज"

वंदना बाजपेई
13.01.14














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