ख़ुशी
खुश रहती हूँ मैं
क्योंकि
नहीं करती
हर माह की
उनंतीस रातें
ख़राब
सिर्फ और सिर्फ
पूर्ण चन्द्र देखने की
ख्वाहिश में
इसीलिए
जीवन की
हर कुरूपता
असामानता
और
अपूर्णता में
ढूंढ लेती हूँ
ख़ुशी के
कुछ कतरे।
-Vandana Bajpai
खुश रहती हूँ मैं
क्योंकि
नहीं करती
हर माह की
उनंतीस रातें
ख़राब
सिर्फ और सिर्फ
पूर्ण चन्द्र देखने की
ख्वाहिश में
इसीलिए
जीवन की
हर कुरूपता
असामानता
और
अपूर्णता में
ढूंढ लेती हूँ
ख़ुशी के
कुछ कतरे।
-Vandana Bajpai
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें