रविवार, 12 जनवरी 2014

khushi

                                                                          ख़ुशी 


खुश रहती हूँ मैं
क्योंकि
नहीं करती
हर माह की
उनंतीस रातें
ख़राब
सिर्फ और सिर्फ
पूर्ण चन्द्र देखने की
ख्वाहिश में
इसीलिए
जीवन की
हर कुरूपता
असामानता
और
अपूर्णता में
ढूंढ लेती हूँ
ख़ुशी के
कुछ कतरे।

-Vandana Bajpai

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