विध्वंस
फिर आज कुछ गलत हो गया
कुछ शब्द
पकने से पूर्व
वाक्यों में गढ़ने से पूर्व
यूं ही टूटे-फूटे
अचानक
निकल गए
मुँह की देहरी लांघ कर
जो कहना चाहते थे
अंतर्मन की
कुछ अकथ
कथाओं को
परन्तु समुचित
आकार के अभाव में
अचानक सहस्त्रगुणा हो
तीव्र गति से
कानों से घुस कर
पहुँच गए
मन सत्ता का
विध्वंस करने…
-Vandana Bajpai
फिर आज कुछ गलत हो गया
कुछ शब्द
पकने से पूर्व
वाक्यों में गढ़ने से पूर्व
यूं ही टूटे-फूटे
अचानक
निकल गए
मुँह की देहरी लांघ कर
जो कहना चाहते थे
अंतर्मन की
कुछ अकथ
कथाओं को
परन्तु समुचित
आकार के अभाव में
अचानक सहस्त्रगुणा हो
तीव्र गति से
कानों से घुस कर
पहुँच गए
मन सत्ता का
विध्वंस करने…
-Vandana Bajpai
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