वसुधैव कुटुंबकम
पापा
आपके जाने के बाद
रो कर ,तड़प कर
चीख-चिल्लाकर
कितना किया याद
हर पल में आपकी
अनुपस्थिति नज़र आती
ज़िन्दगी अजीब
निराशा से भर जाती
फिर अपने आँसू पोंछ
देखा चारों ओर
अरे! आस-पास
अगल-बगल
ये आप ही तो हैं
ये आप ही तो हैं
जो अपने अनगिनत
झुर्रीदार हाथों से
फेर देते हैं
मेरे सिर पर हाथ
ये आप ही तो हैं
जो अनगिनत रूप धरे
लाठी टेकते हुए
आ जाते हैं मेरे घर
मार्गदर्शन देने के लिए
ये आप ही तो है
जो असंख्य सलवट पड़ी
आँखों से देखते है
खुश हो कर
मेरा प्यारा घर
अब जब दुःख से
निकल पाई हूँ
तब जान पाई हूँ
क्यों कराते थे
ऋषि-मुनि बार-बार याद
"वसुधैव कुटुंबकम" का पाठ
-Vandana Bajpai
(3.12.2013)
पापा
आपके जाने के बाद
रो कर ,तड़प कर
चीख-चिल्लाकर
कितना किया याद
हर पल में आपकी
अनुपस्थिति नज़र आती
ज़िन्दगी अजीब
निराशा से भर जाती
फिर अपने आँसू पोंछ
देखा चारों ओर
अरे! आस-पास
अगल-बगल
ये आप ही तो हैं
ये आप ही तो हैं
जो अपने अनगिनत
झुर्रीदार हाथों से
फेर देते हैं
मेरे सिर पर हाथ
ये आप ही तो हैं
जो अनगिनत रूप धरे
लाठी टेकते हुए
आ जाते हैं मेरे घर
मार्गदर्शन देने के लिए
ये आप ही तो है
जो असंख्य सलवट पड़ी
आँखों से देखते है
खुश हो कर
मेरा प्यारा घर
अब जब दुःख से
निकल पाई हूँ
तब जान पाई हूँ
क्यों कराते थे
ऋषि-मुनि बार-बार याद
"वसुधैव कुटुंबकम" का पाठ
-Vandana Bajpai
(3.12.2013)
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