" उत्तरदायित्व "
समाज के
हर क्षेत्र में होते है
उस क्षेत्र के ठेकेदार
जो अपने क्षेत्र में
जमने वाले
नव अंकुरों पर
इतनी जोर से करते है
आलोचना कि कुल्हाड़ी से वार
हो जाती है हत्या
किसी नव कोपल की
दफ़न हो जाते है
कुछ बीज अपने
सपनो कि मिटटी में
नहीं मिला पाते आँखे
कभी उगते सूरज से
क्या यह उत्तरदायित्व
नहीं है बड़ो का
कि फूट जाने दे कुछ कोपले
निकल आने दे
कुछ पत्तियाँ
मजबूत हो जाने दे
थोडा तना
फिर आजमायें
अपनी कुल्हाड़ी की धार
vandana bajpai
समाज के
हर क्षेत्र में होते है
उस क्षेत्र के ठेकेदार
जो अपने क्षेत्र में
जमने वाले
नव अंकुरों पर
इतनी जोर से करते है
आलोचना कि कुल्हाड़ी से वार
हो जाती है हत्या
किसी नव कोपल की
दफ़न हो जाते है
कुछ बीज अपने
सपनो कि मिटटी में
नहीं मिला पाते आँखे
कभी उगते सूरज से
क्या यह उत्तरदायित्व
नहीं है बड़ो का
कि फूट जाने दे कुछ कोपले
निकल आने दे
कुछ पत्तियाँ
मजबूत हो जाने दे
थोडा तना
फिर आजमायें
अपनी कुल्हाड़ी की धार
vandana bajpai
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