"कविता "
रखा है
मैंने तुम्हे
अपने मस्तिष्क के
गर्भ में
पोषित किया है
संचित
अनुभव से
धड़काया है
तुम्हारा ह्रदय
अपने मन के
कोमल भावो से
सजाया है
अश्रु बूंदो से
असह्य वेदना के साथ
जन्म दिया है
कलम के
मुख से
जननी हूँ
मैं तुम्हारी
और
तुम हो
मेरी कविता
वंदना बाजपेई
रखा है
मैंने तुम्हे
अपने मस्तिष्क के
गर्भ में
पोषित किया है
संचित
अनुभव से
धड़काया है
तुम्हारा ह्रदय
अपने मन के
कोमल भावो से
सजाया है
अश्रु बूंदो से
असह्य वेदना के साथ
जन्म दिया है
कलम के
मुख से
जननी हूँ
मैं तुम्हारी
और
तुम हो
मेरी कविता
वंदना बाजपेई
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