" छोटा मुँह बड़ी बात "
नदी या सागर
जिसे भी देता है
ईश्वर
गति या आकर
बोल-बोल कर
आठो पहर
करता ही रहता है
अपनी
श्रेष्ठता का गुणगान
और दीन -हीन तालाब
अपनी छोटेपन को
सम्भाले
रहता है शांत मौन
नहीं दिखाता मान
जब डालता है कोई
कंकड़
थोड़ी देर को होती है
हलचल
जैसे कहना चाहता हो
कुछ अपने जज्बात
फिर हो जाता है मौन
अपनी क्षुद्रता के साथ
कौन सुनेगा ?
हँसेगे लोग
करेगे उपहास
"छोटा मुँह बड़ी बात "
vandana bajpai
नदी या सागर
जिसे भी देता है
ईश्वर
गति या आकर
बोल-बोल कर
आठो पहर
करता ही रहता है
अपनी
श्रेष्ठता का गुणगान
और दीन -हीन तालाब
अपनी छोटेपन को
सम्भाले
रहता है शांत मौन
नहीं दिखाता मान
जब डालता है कोई
कंकड़
थोड़ी देर को होती है
हलचल
जैसे कहना चाहता हो
कुछ अपने जज्बात
फिर हो जाता है मौन
अपनी क्षुद्रता के साथ
कौन सुनेगा ?
हँसेगे लोग
करेगे उपहास
"छोटा मुँह बड़ी बात "
vandana bajpai
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