शनिवार, 21 दिसंबर 2013

MUKTI

                                                           "मुक्ति "



एक असाध्य मानसिक रोग की
शिकार कन्या की माँ
सारी  उम्र ,डॉक्टरों
पंडितो, मौलवियों के पास
 भटकती रही
निर्जला व्रत ,अनेकप्रकार के  दान
पूस में तारो के नीचे स्नान
करती रही
जैसे -जैसे कन्या की उम्र
बढ़ती गयी
भयभीत माँ की तपस्या ,
बढ़ती गयी
समाज के तानो
  रि स्तेदारो का असहयोग
अपने बाद बेटी के
भविष्य को सोंच
हो लाचार
फिर गयी ईश्वर के
दरबार
जुटा कर अदम्य शक्ति
मांगी
बेटी की मुक्ति
अगली सुबह बेटी के
शव्  के सामने
,विस्फारितनेत्रो ,से देखती ,
सूखे अधरो से बुद्बुदायी ,
हे ईश्वर ,
आख़िरकार काम आ गयी
"मेरी भक्ति"
मिल गयी मेरी लाडो को
मुक्ति

VANDANA BAJPAI
21.12.13

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