कहानी
(अशुभ : part 2)
और ये " दुलारी !" ये तो उसका नाम कभी नहीं हो सकता! उसे तो किसी का प्यार दुलार मिला ही नहीं। न माँ का ,न भाई का ,न पति का और इस नाम से तो उसे किसी ने पुकारा ही नहीं।
ये....ये उसका पति कैसे ?… कैसे वो पूजा-पाठ में किसी और का नाम ले सकता है ?! और ये उसका भाई… जो उससे दस साल छोटा है पर कभी भी उसने उसको दीदी कहकर नहीं पुकारा और अब तो पिछले चार सालों से पति द्वारा परितक्त्य ,निसंतान ,निरीह अपने भाई पर बोझ बनी तमाम अप्रिय उपलंभों से सुशोभित होती रही है।
क्या मृत्यु के बाद भाई,पति रिश्ते-नातेदार सब उस नाम को भूल गए जो शुरू-शुरू में उसके कान में पिघले शीशे की तरह चुभता रहता था। पर धीरे-धीरे उसने उस नाम के साथ आत्मसात कर लिया था। उसे तो यहाँ तक लगने लगा था कि और बच्चों के नाम तो उनके माता-पिता रखते हैं पर उसका नाम तो विधाता ने जन्म के साथ ही उसके माथे पर छाप दिया था। वो नाम था अशुभ ।
" ॐ "..... मंत्रोच्चारण होने लगा। हवन कुंड में से समिधा के जलने का धुआँ निकलने लगा। उस धुंए ने अचानक दुलारी की धुंधली यादें ताज़ा कर दीं। वो सीधे बचपन में पहुँच गई जब उसकी उम्र कोई 5-6 वर्ष रही होगी।
क्रमशः...
To be continued...
-Vandana Bajpai
(अशुभ : part 2)
और ये " दुलारी !" ये तो उसका नाम कभी नहीं हो सकता! उसे तो किसी का प्यार दुलार मिला ही नहीं। न माँ का ,न भाई का ,न पति का और इस नाम से तो उसे किसी ने पुकारा ही नहीं।
ये....ये उसका पति कैसे ?… कैसे वो पूजा-पाठ में किसी और का नाम ले सकता है ?! और ये उसका भाई… जो उससे दस साल छोटा है पर कभी भी उसने उसको दीदी कहकर नहीं पुकारा और अब तो पिछले चार सालों से पति द्वारा परितक्त्य ,निसंतान ,निरीह अपने भाई पर बोझ बनी तमाम अप्रिय उपलंभों से सुशोभित होती रही है।
क्या मृत्यु के बाद भाई,पति रिश्ते-नातेदार सब उस नाम को भूल गए जो शुरू-शुरू में उसके कान में पिघले शीशे की तरह चुभता रहता था। पर धीरे-धीरे उसने उस नाम के साथ आत्मसात कर लिया था। उसे तो यहाँ तक लगने लगा था कि और बच्चों के नाम तो उनके माता-पिता रखते हैं पर उसका नाम तो विधाता ने जन्म के साथ ही उसके माथे पर छाप दिया था। वो नाम था अशुभ ।
" ॐ "..... मंत्रोच्चारण होने लगा। हवन कुंड में से समिधा के जलने का धुआँ निकलने लगा। उस धुंए ने अचानक दुलारी की धुंधली यादें ताज़ा कर दीं। वो सीधे बचपन में पहुँच गई जब उसकी उम्र कोई 5-6 वर्ष रही होगी।
क्रमशः...
To be continued...
-Vandana Bajpai

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