तुम फूल बने हो मधुबन के
क्यों डाली पर इठलाते हो
क्या तुमने ये जग जीत लिया
जो जंगल में पुष्प खिलता है
वो भी तो खुशबु देता है ।
तुम बने हो मंदिर का दिया
क्यों खुद को भगवान समझते हो
क्या तुमने ये जग जीत लिया
जो दीपक कुटिया में जलता है
वो भी तो अँधियारा हरता है ।
तुम बने हो राजा देश के
क्यों सब पर रौब जमाते हो
क्या तुमने ये जग जीत लिया
जो भिखारी भीख मांगता है
वो भी एक पात्र निभाता है ।
तुम फाइव स्टार के पिज़्ज़ा बने
क्यों इतना इतराया करते हो
क्या तुमने ये जग जीत लिया
रोटी गेहूं की जो होती है
वो भी तो भूख मिटाती है ।
तुम हो ऊंचे ओहदे वाले
क्यों इतना अकड़ा करते हो
क्या तुमने ये जग जीत लिया
जो जीवन की दौड़ में हारा है
वो भी माँ की आँख का तारा है ।
-Vandana Bajpai
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