शनिवार, 23 नवंबर 2013





मैं भी चाहता हूँ तुम जाओ 
ऊंचे ऊंचे पर्वत पर चढ़ जाओ
पैरों में एक बेड़ी डालूँ
अब चलने को आजाद हो तुम.

मैं भी चाहता हूँ उड़ पाओ
सूरज से जाकर मिल आओ
आओ तुम्हारे पर  मैं काटूं
अब उड़ने को आज़ाद हो तुम.

मैं भी चाहता हूँ तुम बोलो
दिल के सारे भेद तुम खोलो
आओ तुम्हारे होठ सिल डालूँ
अब कहने को आजाद हो तुम.

मैं भी चाहता हूँ तुम देखो
फूलों पर चिड़ियों सी चहको
आँखों पर एक पर्दा डालूँ
अब देखने को आजाद हो तुम.

मैं भी चाहता हूँ तुम नाम कमाओ
अपना ऊंचा कोई मुकाम बनाओ
आओ तुम्हारी हिम्मत तोडूँ
अब प्रतिस्पर्धा को आजाद हो तुम.

मैंने तुमको सब कुछ दे डाला
फिर भी तुमको समझ ना आया
अपना झंडा , बैनर हटाओ
आखिर औरत जात हो तुम.

-Vandana Bajpai

(pic credit:Google)

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