मन
मन मेरे मुझ पर तुम क्यों
अपना अधिकार जताते हो ?
जब मैं एक धुन पर मगन हुई
तुम खींच कहीं ले जाते हो
तुम प्रेमी हो कुछ अनगढ़ से
जो हर डाली पर लटक रहे
मैं कैसे ह्रदय द्वार खोलूं
यायावर से तुम भटक रहे
अक्सर मुझे छोड़ अकेले में
तुम और कहीं मुड़ जाते हो
जीवन भर साथ निभाने की
जब कसम उठाई है तुमने
तो दिल पर रखकर हाथ कहो
क्या प्रीत निभाई है तुमने ?
मैं धीरे-धीरे चलती हूँ
तुम पल-भर में उड़ जाते हो
मैं जानती हूँ मैं ही हारूँगी
तुम को ही मिलेगी जीत नई
एकतरफा प्रीत निभाने की
होती है जगत में रीत यही
सर्वाधिकार सुरक्षित कर
तुम बहुत-बहुत इठलाते हो
मन मेरे मुझ पर तुम क्यों
अपना अधिकार जताते हो ?
-Vandana Bajpai
मन मेरे मुझ पर तुम क्यों
अपना अधिकार जताते हो ?
जब मैं एक धुन पर मगन हुई
तुम खींच कहीं ले जाते हो
तुम प्रेमी हो कुछ अनगढ़ से
जो हर डाली पर लटक रहे
मैं कैसे ह्रदय द्वार खोलूं
यायावर से तुम भटक रहे
अक्सर मुझे छोड़ अकेले में
तुम और कहीं मुड़ जाते हो
जीवन भर साथ निभाने की
जब कसम उठाई है तुमने
तो दिल पर रखकर हाथ कहो
क्या प्रीत निभाई है तुमने ?
मैं धीरे-धीरे चलती हूँ
तुम पल-भर में उड़ जाते हो
मैं जानती हूँ मैं ही हारूँगी
तुम को ही मिलेगी जीत नई
एकतरफा प्रीत निभाने की
होती है जगत में रीत यही
सर्वाधिकार सुरक्षित कर
तुम बहुत-बहुत इठलाते हो
मन मेरे मुझ पर तुम क्यों
अपना अधिकार जताते हो ?
-Vandana Bajpai
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