बुधवार, 27 नवंबर 2013

Ashubh : Part 5

                                                                        कहानी 
                                                                 (अशुभ : Part 5)

सास कड़क आवाज़ में बोली ,"ब्याह तो कर लिया है पर साल भर तक गृह-प्रवेश नहीं करने दूंगी। पहले देख तो लूं ये हमारे परिवार के लिए कितनी अशुभ है। " उसे बाहर का कमरा मिल गया जहाँ से वो पीछे के दरवाज़े से अंदर रसोई तक जाती ,दिन भर खाना बनाती ,रात में अपने कमरे में आकर अकेले सो जाती। साल बीतने लगा...
          पड़ोसी  की चाची की सास मर गईं वो अशुभ ,कल्लू कुमार की लड़की भाग गई … वो अशुभ और चार घर छोड़ जो बनारसी दास चाचा रहते हैं उनकी भैंस… जो पिछले 10 साल से उनकी सेवा कर रही थी गुज़र
गई … च च च च ! धीरे-धीरे उसकी अशुभता की सूची लम्बी होने लगी। सास ने अपने बेटे की दूसरी शादी तय कर दी। कौन नहीं चाहेगा कि उसका माल दो बार बिके। दोबारा दहेज़ ,गाना-बजाना वाह!…
          उस अभागन की तरफ से बोलने वाला कौन था ? नयी बहु आई। गाना-बजाना ,हंसी-ख़ुशी में 15 दिन निकल गए। फिर अचानक सास को साँप ने काट लिया। सास तो परलोक सिधार गई पर दोष उस बेचारी पर आया। सौतिया-डाह हो गया होगा ,उसने पानी पी-पी कर कोसा होगा  तभी तो… पति ने चोटी पकड़ खींचते हुए उसे घर से बाहर कर दिया।
          रोती-तड़पती माँ के पास आई। माँ व राघव का दिल किसी अशुभ कि आशंका से फिर धड़कने लगा। सबकी सहमति से राघव उसे मथुरा के अबला-केंद्र में छोड़ आया।

क्रमशः ...
To Be Continued...

-Vandana Bajpai


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें