शुक्रवार, 22 नवंबर 2013

Maa

माँ 
   

मुझे प्यार है अपने हाथो की सब उंगलियों से,


न जाने कौन सी ऊँगली पकड़ के माँ ने मुझे चलना सिखाया होगा ।


इन्ही पंक्तियों को जीवन मूल्य मानकर मैं ,
संसार की समस्त माओं  के लिए कुछ  लिख  रही हूँ । 
     
गर्भ में अपने जिसने रखकर , यह संसार है दिखलाया,
कलम पकड़कर पहला  अक्षर , जिसने मुझसे लिखवाया ।

मेरी खातिर कितनी रातें , न जाने है वो जागी ।
अपनी हर गलती पर मुझको , मिल जाती जिससे माफ़ी ॥

हे माँ अपने चरणों में स्वीकार करो नमन मेरा ।
धन वैभव इन सबसे बढ़कर , है अमूल्य आशीष तेरा ॥

-Vandana Bajpai

(pic credit : Google)

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