माँ
मुझे प्यार है अपने हाथो की सब उंगलियों से,
न जाने कौन सी ऊँगली पकड़ के माँ ने मुझे चलना सिखाया होगा ।
इन्ही पंक्तियों को जीवन मूल्य मानकर मैं ,
संसार की समस्त माओं के लिए कुछ लिख रही हूँ ।
संसार की समस्त माओं के लिए कुछ लिख रही हूँ ।
गर्भ में अपने जिसने रखकर , यह संसार है दिखलाया,
कलम पकड़कर पहला अक्षर , जिसने मुझसे लिखवाया ।
मेरी खातिर कितनी रातें , न जाने है वो जागी ।
अपनी हर गलती पर मुझको , मिल जाती जिससे माफ़ी ॥
हे माँ अपने चरणों में स्वीकार करो नमन मेरा ।
धन वैभव इन सबसे बढ़कर , है अमूल्य आशीष तेरा ॥
कलम पकड़कर पहला अक्षर , जिसने मुझसे लिखवाया ।
मेरी खातिर कितनी रातें , न जाने है वो जागी ।
अपनी हर गलती पर मुझको , मिल जाती जिससे माफ़ी ॥
हे माँ अपने चरणों में स्वीकार करो नमन मेरा ।
धन वैभव इन सबसे बढ़कर , है अमूल्य आशीष तेरा ॥
-Vandana Bajpai
(pic credit : Google)

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