मंगलवार, 19 नवंबर 2013

Sindoor

                                                                     सिंदूर 

नारी का श्रृंगार 
सुहाग का प्रतीक 
या प्रेम कि मूक भाषा 

इन उपालंभों के अतिरिक्त 
मुझे लगता है 
रोज़ सुबह 
दर्पण के सामने 

अपनी मांग में लाल सिन्दूर से 
मैं खींच देती हूँ 
एक लक्षमण रेखा 

जिसे देखकर 
कुछ ठिठकते हैं 
दूसरों के पाँव 
आगे बढ़ने से 

कुछ ठिठकते हैं 
तुम्हारे पाँव 
कहीं बहकने से 

(pic credit: Google)

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