मंगलवार, 10 फ़रवरी 2026

प्रेम को समर्पित कुंडली छंद

 








बढ़ चला है, अब अकेले बाँसुरी की तान पर

मन हुआ मीरा सखी री, आठ पहरे ध्यान कर

छूटते जाते नगर और गाँव, गालियां उर बसी

भेंट करने मैं चली जब से पिया को साँस लर

वंदना बाजपेयी

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