जीवन हर पल साथ-साथ चलता शिक्षक है l
पहली शिक्षक माँ बनी.. जब उन्होंने पहली बार गोद में लेकर सिखाया कि, “निश्चल प्रेम ही ईश्वर है |”
पिता दूसरे शिक्षक हुए जिन्होंने सिखाया कि प्रेम में अनुशासन भी शामिल हो, तभी सफलता हैl
तीसरे शिक्षक भाई बहन हुए... जब तवे उतरी एक रोटी के चार टुकड़े कर के हम सब की थाली में डाले गए... तब सीखा “सामंजस्य ही प्रेम और सफलता की कुंजी है|”
स्कूल के शिक्षकों ने अक्षर ज्ञान करवा कर पैरों पर खड़े होने के काबिल बनवाया l
जीवनसाथी के साथ बड़े होने के क्रम में साथ साथ सीखा रिश्तों को संभालना सीखा l
वरिष्ठों के अनुभवों ने जीवन दर्शन को समृद्ध किया तो कनिष्ठों से प्रेम और सम्मान देना l
मित्रों ने हाथ थाम कर सिखाया कि, “आपसी सहयोग ही समस्याओं से निपटने की ताकत देता हैl"
फिलहाल बच्चे मेरे शिक्षक हैं .. उम्र के इस हल्के सुस्ताने के दौर में मैं उनसे ऊर्जावान रहना सीखती हूँ | और ये भी कि हर चीज को हम किसी नए दृष्टिकोण से कैसे देख सकते हैं |
जीवन की सबसे कठिन शिक्षायेँ अपने हाथ जला कर सीखी l इसकी फीस बहुत ज्यादा थी l लेकिन आज लगता है कि अपने अंदर का कुछ पुराना तोड़ कर विकास के क्रम में कुछ नया सीखने के लिए बहुत आवश्यक था l
किताबों ने सिखाया कि, “जब कोई ना दे साथ, तब हम हैं तुम्हारे पास”
अब बिना वजह जमा किया (भौतिक +अभौतिक) छोड़ना सीख रही हूँ l
अभी पाती हूँ, बहुत गिरहें बाकी हैं, बहुत कुछ सीखना बाकी हैl
शिक्षा का फलक बहुत विस्तृत है l
सीखने-सिखाने का दौर चलता रहे l
शिक्षक दिवस पर सभी को प्रणाम और शुभकामनाएँ
वंदना बाजपेयी

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