मंगलवार, 8 नवंबर 2016

व्रत करती हुई स्त्रियाँ





व्रत करती हुई स्त्रियाँ
पति की दीर्घायु और मंगलकामना के लिए
देवी गीतों को गाती हुई
बड़ी ही आसानी भूल जाती भूख प्यास
व्रत करती हुई स्त्रियाँ
सजाती हैं सुहाग पिटारी
चुनती है फूल
दिन भर रसोई में
बनाती है प्रसाद

व्रत करती हुई स्त्रियाँ
करती है सोलह श्रृंगार
एड़ी महावर , चूड़ियों और सिंदूर
और लाल साडी से
उतर आता है दैवीय रूप
व्रत करती हुई स्त्रियाँ
ध्यान नहीं बुद्धिजीवी स्त्रियों की
पति द्वारा व्रत करने की मांग पर
आँचल में बांध कर चावल के दो दाने
मुस्कुराकर कहती है
भला कहीं प्रेम में भी बराबरी होती है
हो सकती है …………………..
वंदना बाजपेयी

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