बुधवार, 10 दिसंबर 2014

                                                 उत्तर  




                                            (चित्र गूगल से साभार )




मुझे चाहिए 
हाँ !मुझे चाहिए 
उन् सारे प्रश्नों के उत्तर 
जो तरल बन- बन कर 
बहते रहे 
माँ और दादी की आँखों के कोरो से
सदियों से जिनको पूछने का साहस नहीं जुटा पाई औरत
सौपती रही एक धरोहर की तरह अगली पीढ़ी को
चुप रहकर ....चुपचाप
सिखाती रही होठ सीने की कला
की कैसे एक दवानल दिल में दबा कर
जलते रहे है घर के चूल्हे
कैसे एक आग को जिन्दा रखने के लिए
सुलगती रही औरत
राख हो जाने तक

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