शुक्रवार, 8 अगस्त 2014

                                         #################आस्तिक या नास्तिक ##################



 अक्सर यह प्रश्न 
यहां कौन आस्तिक कौन नास्तिक? 
 आदि -अंत विहीन 
एक वलय  की तरह घेर लेता है  मुझे 
सबकी तरह 
मैंने भी तो गढ़ी थी 
ईश्वर की परिभाषा 
और बना लिया था एक रिश्ता 
आस्था के प्रतीकों के साथ 
अपनी श्रद्धा और उसकी दया के मध्य 
बैठा ही लिया था 
गणित का एक फार्मूला 
देने और लेने का ……… 
श्रद्धा के बदले ढूँढा था दाता 
काशी से काबा तक
सारनाथ से जेरुसलम तक 
मिल जाने पर जय जय कार 
न मिलने पर उस पर लगाये थे 
प्रश्नचिन्ह ?
कब किया था प्रेम 
अस्तित्व से 
मीरा की तरह टूट कर 
देने लेने से परे 
प्रेम सिर्फ प्रेम के लिए 
हत भाग्य !!!
कहाँ जाना था ईश्वर को 
 प्रेम के उस स्वरुप में
जो हमारे बीच प्रवाहित है 
प्रेम की एक सतत धारा में  
मैंने भी किया था व्यापार 
और व्यापार में
 नफा -नुकसान  लाज़मी सा है 
 

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