!!!!!!!!!!!!!!!बस बहुत हुआ !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
वातावरण में अजीब सी उमस है
बंद है हवा
बढ़ रहा है ताप
फूटने ही वाला है ज्वालामुखी
हाँ
पिघल -पिघल कर् निकलने वाले हैं
वो काले हर्फ़
जिन्हे सफ़ेद पोशों ने
छिपा के रखा है
अपने अंदर
जो
किसी हस्ताक्षर में कैद
सुनहरी जिल्द में दफ़न
बढ़ा रहे है
प्रतिष्ठित बैठकों की शोभा
कब से चिल्ला -चिल्ला कर कह रहे थे
बस अब बहुत हुआ
की ये किताब भी अब पढ़ी जानी चाहिए
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