गुरुवार, 24 जुलाई 2014

                                              !!!!!!!!!!!!!!!!!!!अधूरी कहानी !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!


समय नहीं है किसी के पास 
हम सब
सुबह से शाम तक 
घडी की सुइयों के मानिंद  
भाग रहे हैं 
पूरी करने को 
एक अधूरी कहानी
जो छूटेगी
कही न कहीं
किसी न किसी मोड़ पर
कि अरे!
सदा के लिए सो जाने से पहले
 यह तो कहना रह ही गया
अम्माँ से
कि अब  सुनाई नहीं देगी अल सुबह
 पिताजी की 
 बेंत  के लिए पुकार
कि मांगेगी नहीं बहन अब
रक्षा -बंधन की साड़ी
कि चल देगा अचानक बचपन का मित्र
जमी -जमाई बाज़ी छोड़ कर
कभी न खेलने के लिए
रह जायेगा देखना
कि जिस मकान के लिए
लगाई थी जीवन भर की पूँजी
कैसा लगेगा बनने के बाद
आह !
या खुदा
कैसा लेखक है तू
कि तेरी कोई कहानी
कभी मुकम्मल क्यों नहीं होती। …………………

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