सोमवार, 21 जुलाई 2014

                                         !!!!!!!!!!वाह ताज !!!!!!!!!!!


मैंने देखे  है वो घर 
जहाँ नक्काशी दार सोफों के ठीक बगल में
रखा है एक शो केस
जिसमें सजे हैं
खूबसूरत इटैलियन शो पीस
बालकनी में सजे हैं
कतारबद्ध महेंगे कैक्टस और
नायाब बोनसाई
रसोई घर अटा  पड़ा है
क्रिस्टल के बर्तनों से
कपड़ों की अलमारियां भरी हैं
हर विख्यात ब्रांड से
फिर क्यों?
 घुटन सी हैं वहां
फिर क्यों
कुछ कमी है वहां ………
जैसे कैद  हों कुछ साँसे
जैसे अनसुनी हो कुछ मौन चीखें
जैसे बांधें गए हो कुछ आँसू
हाँ शायद …
प्रतिष्ठा की दीवारों में
चुनवा दिए गए हैं
अरमान
पायलों के
अपने पैरों चलने के
डाली गयी है टनों मिट्टी
बिंदियाँ के
अपने प्रकाश से चमकने की इक्षा पर
दफन् हैं स्वप्न
घूंघट के
अपना आसमान छुने के
अजी ! मकबरा है जनाब
बेशक आप चिल्लाइये
वाह ताज                                      
वाह ताज !

  

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें