शुक्रवार, 7 मार्च 2014

                                                           "    स्वर "


एक घर 
रात्रि का दूसरा पहर
आ रहे है
दो स्वर
दोनों तीखे तीक्ष्ण
तीव्र ,पंचम
एक पतला एक भारी
चूड़ियों कि अजीब सी
खन -खन -खन
चट -चट ,पट -पट
धम -धम
चीईईईईईईईईई
सूटकेस खीचने का स्वर
घरॠरररररर…
गाड़ी की तेज
रफ़्तार का स्वर
इन सब के बीच
कही दब के
रह गए
दो कमजोर -मुलायम
मासूम ,आद्र
स्वर
"हमें पापा -मम्मी दोनों चाहिए "

वंदना बाजपेई 

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