आज सुधीर दादी के साथ सुबह - सुबह मंदिर दर्शन को गया है ।
दादी सुमित्रा देवी ने सोंचा कि आज छुट्टी का दिन है .... पोते की छुट्टी है तो चलो उसे ले चलते हैं, आखिर संस्कार भी तो सिखाने हैं ।
सबसे पहले सुमित्रा देवी ने मंदिर के प्रांगन में लगे पीपल को नमस्कार करने को कहा । सुधीर ने पूंछा ' क्यों दादी पेड़ को नमस्कार क्यों करें '।
सुमित्रा देवी ने समझाया ' बेटा पेड़ भी जीवित होता है । उसमें भी आत्मा होती है और हर आत्मा में परमात्मा यानि की भगवान् होते हैं .... इसलिए हमें हर जीव का और पेड़ों का आदर करना चाहिए '।
सुधीर दादी के साथ आगे बढ़ा । दादी ने गणेश जी को लड्डू का भोग लगाने के लिए कहा । सुधीर लड्डू चढ़ा रहा था की लड्डू छिटक कर दूर जा कर गिरा । सुधीर लड्डू उठाने लगा तो सुमित्रा देवी बोलीं ' सुधीर सम्मान के साथ भोग लगाया जाता है । यह गिर गया है तो दूसरा लड्डू चढाओ । किसी को कुछ दो तो इज्ज़त के साथ देना चाहिए ... फिर ये तो परमात्मा हैं '।
4 वर्षीय सुधीर सब समझता जा रहा था । कैसे सम्मान देने के लिए दोनों हाथ लगा कर पूजा करनी चाहिए, कैसे हर जीव का आदर करना चाहिए । सुधीर बहुत खुश था, जैसे की प्रायः बच्चे किसी नयी चीज़ को सीख कर होते हैं ।
पूजा करने के बाद सुधीर दादी के साथ मंदिर से बाहर निकला । भिखारियों की भीड़ लगी थी । दादी ने सुधीर को एक बताशा भिखारी को देने के लिए कहा । सुधीर दोनों हाथ लगा कर बताशा देने लगा , पर बताशा हाथ से फिसलकर कूड़े के पास जा गिरा ।
'दादी दूसरा बताशा दे दो ये गिर गया है .... गन्दा हो गया है | ' सुधीर दादी का पल्ला खींचते हुए बोला ।
' कोई बात नहीं वो उठा लेगा ' कहते हुए दादी भिखारी से बोलीं ... ऐ बताशा उठा ले । भिखारी ने बताशा उठाकर खा लिया । सुधीर देखता रहा ।
सुधीर दादी के साथ घर वापस आ रहा है । वह बार - बार दादी का पल्ला खींचता जा रहा है और पूछता जा रहा है " क्यों दादी बताओ ना ... क्या भिखारी में आत्मा नहीं होती है, प्लीज़ दादी बताओ ना "।
सुमित्रा देवी अपने पल्ले को छुड़ाने का असफल प्रयास करते हुए बड़बड़ा
रही है ' बहुत ऊटपटांग प्रश्न करता है .... सर खा लिया इसने मेरा '।
वंदना बाजपेई
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