रविवार, 30 मार्च 2014

                                                   "मुनियाँ "

               



जब देखो तब 
खी -खी ,खी खी
माँ कि डॉँट
मुनियाँ तुम बड़ी कब होगी ?


हिरनी सी उछलती -कूदती
धीरे चला करो
पिता कि फटकार
मुनियाँ तुम बड़ी कब होगी ?


कोई आ जाये ,पहुँच गयी
बिना बाल संवारे ,बेतरतीब
भाई कि गुहार
मुनियाँ तुम बड़ी कब होगी ?
.............
…………

शादी के पंद्रह दिन बाद
उत्सुक ह्रदय से
मुनियाँ से मिलने गया
पूरा परिवार

घंटे भर समधियों से
 बतियाने के बाद
सासू माँ के बुलाने पर
आती है मुनियाँ .......
माथे तक घूँघट
सजी  -संवरी
सास के पैताने बैठती
एक -एक शब्द
नपा -तुला
मन तराजू में तोलती
धीरे -धीरे बोलती
हौले से
मुस्कुराती है मुनियाँ

टुकुर -टुकुर तकता
हतप्रभ सा सोचता
पूरा परिवार
मुनियाँ
तुम इतनी जल्दी बड़ी हो गयी !


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