" उम्र "
धीरे से
हर कविता कह देती है
कवि कि उम्र
फूल -पत्ती से शुरु कविता
पहुँचती है
प्रेम के पायदान पर
संयोग श्रँगार
वियोग श्रंगार
फिर घर-गृहस्थी
प्यार-तकरार
मानसिक द्वन्द
कुछ खोना
कुछ पाना
सामयिक समस्यायें
और अंत में
रह जाता है
सिर्फ
वैराग्य
vandana bajpai
धीरे से
हर कविता कह देती है
कवि कि उम्र
फूल -पत्ती से शुरु कविता
पहुँचती है
प्रेम के पायदान पर
संयोग श्रँगार
वियोग श्रंगार
फिर घर-गृहस्थी
प्यार-तकरार
मानसिक द्वन्द
कुछ खोना
कुछ पाना
सामयिक समस्यायें
और अंत में
रह जाता है
सिर्फ
वैराग्य
vandana bajpai
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